UPSC Myths: यूपीएससी एग्जाम से जुड़े इन मिथकों से रहें दूर, नहीं तो तैयारी में होगी परेशानी

हाइलाइट्स:

  • जानें यूपीएससी से जुड़े मिथ के बारे में
  • UPSC से जुड़ी किन मिथ से बचना है जरूरी
  • जानें कैसे कर सकते हैं तैयारी

Myths About UPSC Exam: यूपीएससी को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। शायद यही कारण है कि इसकी तैयारी शुरू करने से लेकर परीक्षा देने तक से कई गलतफहमियां या मिथ्याएं जुड़ी हुई हैं। इन गफलतों में अगर आप फंसे तो मुश्किल हो सकती है। बेहतर होगा कि इनकी सच्चाई आप जान लें। इस तरीके से तैयारी के दौरान और उससे पहले होने वाली जबरन की परेशानियों से आप बच सकते हैं।

प्यार और UPSC साथ-साथ नहीं हो सकते
इस थ्योरी या कहें हाइपोथिसिस का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं है। अगर ऐसा होता, तो ज्यादातर शादीशुदा लोगों को आखिरी लिस्ट में जगह ना मिलती। लेकिन सच हम सब जानते हैं, कि इसकी आखिरी लिस्ट में कई शादीशुदा लोगों के नाम होते हैं।

इस हाइपोथिसिस के खिलाफ हम कहेंगे, जहां चाह है, वहां राह है। इसका मतलब ये नहीं कि आप प्यार और रिश्ते बनाने में ही जुट जाएं। इसका केवल इतना सा मतलब है कि कभी भी किसी एक के लिए दूसरे को छोड़ने की गलती ना करें। इससे नुकसान की ही आशंका ज्यादा रहती है।
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सोशल मीडिया, सोशल इंटरेक्शन बंद कर दें
ये सलाह कई लोगों से आपने सुनी होगी। कई लोग तैयारी ना कर पाने के पीछे इस वजह को बताते हैं, लेकिन सच्चाई क्या है वो भी जान लीजिए।
इस सलाह को आप बकवास मान सकते हैं, क्योंकि तैयारी करते वक्त अगर आप किसी से 1 घंटे की भी बातचीत करते हैं तो वो आपके दिमाग को हल्का करेगी और टेंशन भी कम करेगी।

इससे इतर अगर सोशल मीडिया अच्छे तरीके से और रेग्यूलेशन के साथ उपयोग किया जाता है तो ये आपके लिए फायदेमंद ही हो सकता है। इसका मतलब ये नहीं कि आप दिनभर यू-ट्यूब पर बिता दें, या फेसबुक पर क्यूट वीडियोज़ देखने में ही सारा समय खराब कर दें। इसके लिए आप दोषी होंगे। हमेशा किसी भी चीज को लिमिट में करने का फायदा होता है, जबकि हद से ज्यादा करना नुकसानदेह ही होता है।

Prelims के लिए NCERT पर्याप्त हैं
इस झूठ के चक्कर में कभी ना फंसे। इसके लिए केवल NCERT पढ़ना काफी नहीं है और सिर्फ NCERT को पूरा घोट लेना भी जरूरी नहीं है। इससे केवल फंडामेंटल्स यानी बेसिक कॉन्सेप्ट समझ आते हैं। कई दूसरी किताबें भी ऐसा करती हैं, UPSC ने ऐसी किसी किताब का जिक्र नहीं किया है लेकिन आपको बस ये ध्यान रखना है कि आप सिलेबस के आधार पर ही पढ़ाई करें।
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अखबार न पढ़ें, मैगजीन पर्याप्त हैं
इस गलतफहमी के चक्कर में कई उम्मीदवार मुश्किल में पड़ जाते हैं। ये सलाह आसान भी है। लेकिन यकीन मानिए ये सही नहीं है। न्यूजपेपर या अखबार आपको घटनाचक्र से जुड़ी राय बनाने में मदद करते हैं, जो निश्चित तौर पर Mains में आपके काम आती है। अखबार पढ़ने से आपकी भाषा भी मजबूत होगी जो मुख्य परीक्षा लिखते वक्त आपकी लिखावट में झलकेगी। आपके आस-पास हो रहे इवेंट्स से आप न्यूजपेपर की मदद से आसानी से रूबरू हो सकते हैं, लेकिन मैगजीन आपसे ये सुविधा भी छीन लेती है।

इससे इतर कुछ और गलतफहमियां जिनके चक्कर में आपको नुकसान हो सकता है –

  • 24 घंटे पढ़ना जरूरी है
  • तैयारी के लिए कोचिंग जरूरी है
  • केवल इंग्लिश मीडियम के उम्मीदवारों को चुना जाता है
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