Revolutions In India: इन क्रांतियों ने बदली देश की तस्‍वीर, एग्जाम्स में आते हैं सवाल, बना लें नोट्स

Major Revolutions In India: सन् 1947 में देश की आजादी के डेढ़ दशक बाद भी भारत खाद्यान्न की समस्या से उभर नहीं पा रहा था। उस समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को दो जून की रोटी मुहैया कराने की थी। उस समय देश की जनसंख्या वृद्धि दर भी खाद्यान्न उत्पादन दर से अधिक थी। खाद्यान्न की समस्या से पार पाने के लिए पहली बार हरित क्रांति की शुरुआत की गई। यह क्रांति इतनी सफल हुई कि देश के खाद्यान्न उत्पादन की दिशा ही बदल गई। इस क्रांति का देश पर इतना व्यापक और प्रभावशाली असर हुआ कि प्रति वर्ष एक के बाद एक कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतियों का आगमन होता गया और देश कृषि विकास की बुलंदियों को छूता गया।

इन क्रांतियों के कारण ही देश की परम्परागत खेती में सुधार हुआ है। बता दें कि इस समय भारत के कुल क्षेत्रफल के 51 प्रतिशत भाग पर खेती की जा रही है। इसलिए कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाती है। वर्ष 1958 में जब भारत में पहली बार 120 लाख टन गेहूं में 50 लाख टन की बढ़त से कुल 170 लाख टन गेहूं पैदा हुआ, तो अमरीकी वैज्ञानिक डॉ. विलियम गाड ने इसे हरित क्रांति की शुरूआत कहा था।

देश की मुख्‍य 8 क्रांतियां (8 Major Revolutions of India)

हरित क्रांति (Green Revolution)
भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने व आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए वर्ष 1966-67 में हरित क्रांति की शुरुआत की गई थी, जिससे गेहूं के उत्‍पादन में भारी बढ़ोत्‍तरी हुई।

श्वेत क्रांति (White Revolution)
दुग्‍ध के क्षेत्र में देश आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए 1970 में श्वेत क्रांति की शुरुआत की गई। डॉ.वर्गिज कुरियन को इस क्रांति का जनक माना जाता है। आज के समय में हम दुग्ध उत्पादन में नंबर वन हैं।

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नीली क्रांति (Blue Revolution)
मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्‍पादन बढ़ाने के लिए इसकी शुरुआत की गई, यह पंचवर्षीय योजना 1985 से 1990 के बीच शुरू हुई। इसकी वजह से देश में मछली पालन, प्रजनन, विपणन और निर्यात में बहुत सुधार हुआ।

पीली क्रांति (Yellow Revolution)
देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए पीली क्रांति की शुरूआत की गई। तिलहन के लिए ही मस्टर्ड मिशन भी शुरू किया गया है, तिलहन में नौ फसलों सूरजमुखी, सोयाबीन, मूंगफली, अरंडी, तिल, राई और सरसों, अलसी एवं कुसुम को शामिल किया जाता है। हालांकि तिलहन उत्‍पादन में देश आज भी पीछे है।

लाल क्रांति (Red Revolution)
देश में मांस और टमाटर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लाल क्रांति की शुरुआत की गई। जबकि झींगा मछली उत्पादन में वृद्धि के लिए गुलाबी क्रांति शुरू की गई।

गोल क्रांति
गोल क्रांति की शुरूआत देश में आलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया गया। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों एवं रोग रोधी किस्मों से भारत में आलू क्रांति संभव हुई। चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक भारत ही है।
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सुनहरी क्रांति
यह फल उत्पादन से संबंधित है, राष्ट्रीय बागवानी मिशन 2005-06 में फलों के बगीचों, बीजों के विकास के लिए शुरू किया गया था। भारत फल उत्पादन में लगातार आगे बढ़ रहा है।

हरित सोना क्रांति
इसका संबंध बांस उत्पादन से है। भारत में बांस के वन सर्वाधिक हैं, देश में बांस की 136 किस्में हैं। इनमें से 89 किस्में पूर्वोत्तर क्षेत्र में मिलती हैं। बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए अब सरकार ने इसे घास की श्रेणी में डाल दिया है।

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