GK Updates: पूरी दुनिया में कछुओं की हैं 300 प्रजातियां, जानें वैज्ञानिक नाम और फैक्ट्स

Facts About Turtles: कछुए का वैज्ञानिक नाम टेस्टुडीनिडे Testudinidae है। वैसे तो धरती पर पाए जाने वाले लगभग सभी जीव-जंतुओं के दांत होते हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि कछुओं के मुंह में दांत नहीं होते। दांत के बदले कछुओं के मुंह में एक तीखी प्लेट की तरह हड्डी का पट्ट होता है, जो उन्हें खाना चबाने में मदद करता है। वैज्ञानिकों ऐसा दावा करते हैं कि कछुओं का अस्तित्व धरती पर करोड़ों साल पुराना है।

1. कछुए दुनिया के सबसे पुराने सरीसृप समूहों (reptile groups) में से एक हैं। उनकी उत्पत्ति डायनासोर के समय से हुई है, जो लगभग 200 मिलियन वर्ष पहले की है, जो उन्हें सांपों, मगरमच्छों और घड़ियाल से काफी उम्रदराज बनाती है।

2. कछुए का खोल (shell) असल में उसके कंकाल (skeleton) का एक हिस्सा होता है और लगभग 50 हड्डियों से बना होता है। खोल कछुए की पसली के पिंजरे और रीढ़ का एक हिस्सा बनाता है। एक कछुए का खोल वास्तव में एक मानव कंकाल की तरह अपनी उम्र के साथ बढ़ता है।
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3. कछुए कभी भी अपने खोल (shell) से बाहर नहीं निकल पाते हैं। उनके गोले उनके साथ बढ़ते हैं और उनके लिए अपने गोले को बढ़ाना असंभव है। समुद्री कछुए, अन्य कछुओं के विपरीत, अपने फ्लिपर्स और सिर को वापस अपने गोले में वापस नहीं ले सकते।

4. कछुओं को भोजन में जेलीफिश बहुत पसंद होती है, हालांकि कुछ प्रजातियां जहरीली होती हैं। जेलीफिश के लिए उनकी भूख कभी-कभी उनके लिए हानिकारक साबित हो जाती है, क्योंकि कई बार वे प्लास्टिक को निगल जाते हैं, यह सोचकर कि यह एक तैरती हुई जेलिफिश है, जो उनका गला घोंट सकती है। कछुए प्रकृति में शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी हो सकते हैं।

5. कछुए हवा में सांस लेते हैं और जमीन पर अंडे देते हैं, जिससे वे एमनियोट बन जाते हैं। भले ही वे अपना अधिकांश जीवन पानी के भीतर बिताते हैं, फिर भी वे अपने अंडे जमीन पर ही देते हैं। अधिकांश समुद्री जीव एनामनियोट्स हैं, जिसका अर्थ यह है कि वे अपने अंडे पानी के भीतर देते हैं। कछुओं के अंडों से बच्चे निकलने में 90 से 120 दिन का समय यानी करीब 3 महीने का समय लग जाता है।
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6. कछुए ठंडे खून (cold-blooded) वाले होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अविश्वसनीय रूप से उनका जीवन काल लंबा होता है। उनके लंबे जीवन काल का एक अन्य कारण यह है कि उनका चयापचय (metabolism) बहुत धीमा होता है और वे बिना भोजन और पानी के लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। वे कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं।

7. पूरी दुनिया में कछुओं की कुल 300 प्रजातियां (species) हैं, जिनमें से वर्तमान में 129 प्रजातियां संकट में हैं। यह उनके प्राकृतिक आवास (natural habitat) में लगातार मानवीय रुकावटों (human interruptions) के कारण है। कछुओं का मनुष्यों द्वारा भी शिकार किया जाता है और उन्हें अवैध पालतू व्यापार (illegal pet trade) में धकेल दिया जाता है।

IUCN के अनुसार, कछुओं और कछुओं की अधिकांश प्रजातियां असुरक्षित, संकटग्रस्त या गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं। उनके लुप्तप्राय होने का सबसे आम कारण यह है कि उनके मांस, त्वचा, गोले (meat, skin, shells) और अन्य गुणों के लिए उन्हें मार दिया जाता है।

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