Career Tips: नए जमाने के करियर के लिए जरूरी हैं नये स्किल्स सीखना, जानें क्यों?

हाइलाइट्स:

  • अच्छी जॉब पाने के लिए जरूरी हैं स्किल्स?
  • यहां जानें किस फील्ड के लिए कौशल सीखना चाहिए
  • कौन-से हैं वे दो तरह के कौशल?

New Skills For Future Jobs: भारत में रोजगार का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और यह पिछले कुछ दशकों से चल रहा है। उम्मीद की जाती है कि 2022 तक भारत में काम करने वालों में 37% लोग ऐसे होंगे जिनके काम के लिए काफी बदले कौशल की आवश्यकता होगी। नतीजा यह है कि समझने की आवश्यकता को स्वीकार करना बढ़ रहा है।

वाधवानी ऑपरचुनिटी ऐट वाधवानी फाउंडेशन के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, सुनील दहिया ने कौशल से जुड़ी सभी खास बातों के बारे में बताया है। जिसमें किन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार की संभावना बनने वाली है? नए जमाने के किन कौशलों की आवश्यकता है? उत्पादकता कैसे बढ़ सकती है? यह सभी सवाल शामिल हैं-

यहां जानें कुछ तथ्य
देश की आबादी का 50% से ज्यादा 25 साल से कम उम्र का है। इसलिए, उद्योग 4.0 की आवश्यकता एक कार्यकुशल, सुप्रशिक्षित कार्यबल की है जिसके परिणामस्वरूप समय रहते कौशल विकास पर फोकस किया जा रहा है।

अभी हाल तक भारतीय कामगारों में सिर्फ 10% को औपचारिक कौशल प्रशिक्षण मिला था और एसपायरिंग माइंड्स के अनुसार, “महज 26% इंजीनियर नौकरी में रखने लायक है, तथा हमारे छात्र अगले दशक के लिए तैयार नहीं हैं।”
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व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास को बढ़ावा देना
समय बदल रहा है और भिन्न स्टेकधारकों के साथ मिलकर व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा कौशल विकास को बढ़ावा देने पर नया जोर है। उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की स्थापना कौशल विकास की पहल को व्यवस्थित करने के लिए की गई है।

यही कारण है कि कई व्यावसायिक और कौशल विकास कंपनियां सक्रियता से आवश्यक कौशल प्रशिक्षण देने के काम में लगी हुई हैं। इस अभियान को भारत सरकार की योजना से भी गति मिल रही है। इसके तहत 2022 तक नेशनल स्किल डेवलपमेंट मिशन के जरिए 400 मिलियन भारतीयों को प्रशिक्षण दिया जाना है।

विकास के लिए जरूरी है कौशल
कौशल विकास के काम से जुड़ी कंपनियां प्रशिक्षण को अपनी आवश्यकताओं के अनुकूल बना रही है और कौशल के अंतर को पाटने के लिए अपने स्तर से प्रयास कर रही हैं। और इसके लिए एक कुशल व प्रमाणित श्रमिक वर्ग का विकास कर रही है।

कौशल मुहैया कराने वाले संस्थान प्रासंगिक और नौकरी के लिहाज से महत्वपूर्ण या उपयोगी कौशल मुहैया करा रहे हैं। चूंकि आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान), आईटीसी (औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र) और सरकारी सहायता वाले अन्य संस्थानों की मौजूदा संरचना भविष्य की रोजगार संभावनाओं के अनुसार लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसलिए डिजिटल मंचों की पहुंच हो रही है और सीखने वालों के लिए ऐसी संस्थाओं के दरवाजे भी खुले हुए हैं। इस तरह उद्योग को पहले दिन से उच्च उत्पादकता देनेवाले तकनीक के जानकार लोग मिल जाएंगे।
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संरचना की कमी
देश में लाखों योग्य छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए भारत को बहुत ज्यादा पेशेवर प्रशिक्षण केंद्रों की आवश्यकता होगी। चालू संरचना बढ़ती आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं है। उद्योग के साथ सरकारी गठजोड़ न सिर्फ कौशल निखारने के लिए आवश्यक होगा बल्कि सही क्षेत्रों में कौशल विकास सुनिश्चित करने के लिए भी इसकी आवश्यकता होगी और यह उद्योग की आवश्यकता के अनुसार होगा। इससे बड़ी संख्या में लोगों की आवश्यकता होगी जो प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रबंध करेंगे और लोगों को प्रशिक्षण दे सकेंगे।

मुख्य बातें

  • प्रौद्योगिकी, ई-कामर्स और दूरसंचार जैसे मुख्य कारण सभी उद्योगों को अपने उत्पाद और सेवाओं के लिए बदलाव की अपनी रणनीति को पुनर्पारिभाषित करने के लिए प्रभावित कर रहे हैं।
  • डिजिटल टेक्नालॉजी का आगमन उद्योग को डिजिटल बदलाव के लिए मजबूर कर रहा है
  • यह तकरीबन सभी क्षेत्रों पर लागू होता है। इनमें टेक्नाल़ॉजी, बीएफएसआई, हेल्थकेयर, रीटेल, परिवहन, आवभगत, पर्यटन, सौंदर्य, टेक्सटाइल, उड्डयन आदि शामिल हैं, तथा इससे प्रतिभा और नए कौशल की भारी आवश्यकताएं खुलेंगी।
  • नए डिजिटल कोर्स और रोजगार के नए मौके कौशल विकास क्षेत्र में भी खुल रहे हैं।

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दो तरह के कौशल
वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम (विश्व आर्थिक मंच) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2018’ यह बताती है कि जेनेरिक कौशल अब ज्यादा काम नहीं आएगा। इसकी जगह, दो प्रकार के कौशल सेट सामने आएंगे: पहला, अत्यधिक विकसित तकनीकी क्षमताओं (मशीन लर्निंग, बिग डेटा रोबोटिक्स आदि) और दूसरा, ‘मानव’ कौशल (बिक्री और विपणन, प्रशिक्षण और विकास, संगठनात्मक विकास आदि) के साथ।

भविष्य के लिए जरूरी है कौशल सीखना
इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि भविष्य में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल का आधा संज्ञानात्मक हैं, बाकी 50% मानव कनेक्शन और काम में सहयोग पर केंद्रित है।
यह जरूरी है कि अर्थव्यवस्था और उद्योग की मांगों के अनुसार नए युग के कौशल का विकास स्कूल के स्तर से ही औपचारिक शिक्षा प्रणाली में एकीकृत किया जाए। इसके साथ ही, औपचारिक शिक्षा प्रणाली के बाहर कौशल निर्माण को अंतर्निहित चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए प्रत्येक कदम पर अधिक ठोस और तात्कालिक कार्रवाई की जरूरत है।

पीटर ड्रकर इसे सबसे उपयुक्त रूप से कैप्चर करते हैं जब वे कहते हैं, “21वीं सदी में महत्वपूर्ण होगा कि, “केवल कौशल नया कौशल सीखने का कौशल है। बाकी सब कुछ समय के साथ अप्रचलित हो जाएगा ।

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