Career In Clinical Research: सबसे ज्‍यादा डिमांड में है क्लीनिकल रिसर्च इंडस्ट्री, ये हैं बेस्ट कोर्स

हाइलाइट्स

  • जानें क्लीनिकल रिसर्च में कितनी एजुकेशन व योग्‍यता है जरूरी
  • इस कोर्स के बाद बना सकते हैं बेहतर करियर
  • यहां जानें क्लीनिकल रिसर्च कोर्स के लिए प्रमुख संस्‍थान

Scope Of Career In Clinical Research: आज के समय में जिस तरह से नई-नई बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं, उससे पूरी दुनिया पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा है। खास कर पिछले दो साल से कोरोना ने जिस तरह पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में जकड़ा है, उससे हर कोई असहाय महसूस कर रहा है। यही कारण है कि आज के समय में क्लीनिकल रिसर्च इंडस्ट्री की वृद्धि में बड़ा उछाल आया है। इस समय वैश्विक दवा का बाजार लगभग 427 बिलियन अमेरिकी डॉलर का माना जा रहा है।

आज के समय में कोरोना वायरस ने इंडिया के साथ पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। जिसके कारण क्लीनिकल रिसर्च इंडस्ट्री का महत्‍व काफी बढ़ गया है। यह वहीं इंडस्ट्री है, जिसने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्‍व करने के साथ कई वैक्‍सीन लाकर लाखों लोगों की जान बचाई। आज के समय में भारत धीरे-धीरे क्लीनिकल रिसर्च इंडस्ट्री का हब बनता जा रहा है। इस समय पूरे विश्‍व में सबसे ज्‍यादा वैक्‍सीन भारत में ही बन रही है। जिस तरह से यह इंडस्ट्री आज आगे बढ़ रही है, उसी के अनुसार युवाओं के लिए करियर के मौके भी मिलते जा रहे हैं। बढ़ती बीमारियों के कारण आज के समय में क्लीनिकल रिसर्च को बढ़ावा देना जरूरत बन गई है।

एजुकेशन व योग्‍यता (Education and Qualification for Clinical Research)
अगर आप इस फील्‍ड में आना चाहते हैं तो आपको 12वीं के बाद क्लीनिकल रिसर्च से संबंधित डिग्री और डिप्लोमा कोर्स करना होगा। अधिकतर स्पेशलाइज्ड कोर्स पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के हैं। मेडिसिन, नर्सिंग, फार्मेसी या लाइफ साइंसेस में बैचलर डिग्री प्राप्त छात्र इनमें प्रवेश ले सकते हैं। एमएससी, एमबीए या एम फार्मेसी कोर्सेस में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट या क्वालिफाइंग एग्जाम के आधार पर मिलता है। एडमिशन में प्रोफेशनल एक्सपीरियंस वाले छात्रों को वरीयता दी जाती है।
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यहां बना सकते हैं करियर (Career In Clinical Research)

क्लीनिकल के फील्‍ड में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (Research and Development in the field of Clinical)
आज के समय में इंडिया क्लीनिकल रिसर्च के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां नई-नई दवाइयों की खोज व विकास संबंधी कार्य किया जा रहा है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट की बात करें तो क्षेत्र में जेनेटिक उत्पादों के विकास, एनालिटिकल आरएंडडी, एपीआई या बल्क ड्रग आरएंडडी क्षेत्र शामिल हैं।

क्लीनिकल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (Manufacturing Sector in Clinical)
अगर आप रिसर्च के जड़ में जाना चाहते हैं तो आप ड्रग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अपना करियर बना सकते हैं। यह छात्रों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मुहैया कराती है। आप चाहें तो इस क्षेत्र में मॉलिक्युलर बायोलॉजिस्ट, फार्माकोलॉजिस्ट, टॉक्सिकोलॉजिस्ट या मेडिकल इन्वेस्टिगेटर बन कर अपना भविष्य संवार सकते हैं। मॉलिक्युलर बायोलॉजिस्ट जीन संरचना के अध्ययन और मेडिकल व ड्रग रिसर्च संबंधी मामलों में प्रोटीन के इस्तेमाल का अध्ययन करता है, जबकि फार्माकोलॉजिस्ट का काम इंसान के अंगों व उत्तकों पर दवाइयों व अन्य पदार्थो के प्रभाव का अध्ययन करना होता है।

फार्मासिस्ट का फील्‍ड (Pharmacist field)
फार्मासिस्ट एक ऐसा फील्‍ड है जो दवाओं के वितरण में सबसे बड़ा योगदान देता है। इनपर दवाइयों और चिकित्सा संबंधी अन्य सहायक सामग्रियों के भंडारण और वितरण का जिम्मा होती है, जबकि रिटेल सेक्टर में फार्मासिस्ट को एक बिजनेस मैनेजर की तरह काम करते हुए दवा संबंधी कारोबार चलाने में समर्थ होना चाहिए।

क्लीनिकल रिसर्च (Clinical Research)
क्लीनिकल रिसर्च फील्‍ड की मुख्‍य शाखा है, कोई नई दवा ईजाद करने से पहले यह भी ध्यान रखा जाता है, कि वह दवा लोगों के लिए कितनी सुरक्षित और असरदार हो सकती है। इसके लिए टीम गठित होती है और फिर क्लीनिकल ट्रायल होता है। भारत में क्लीनिकल के कारोबार में भी तेजी आई है। यही कारण है कि कई नामी विदेशी कंपनियां क्लीनिकल रिसर्च के लिए भारत आ रही हैं। दवाइयों की स्क्रीनिंग संबंधी काम में नई दवाओं या फॉर्मुलेशन का पशु मॉडलों पर परीक्षण करना या क्लीनिकल रिसर्च करना शामिल है जो इंसानी परीक्षण के लिए जरूरी है।
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क्वालिटी कंट्रोल (Quality Control)
मेडसिन के फील्‍ड क्वालिटी कंट्रोल का अहम रोल होता है। जब कोई नई दवा आती है तो उसके बारे में रिसर्च व डेवलपमेंट के अलावा यह सुनिश्चित करने की भी जरूरत होती है कि इन दवाइयों के जो नतीजे बताए जा रहे हैं, वे सुरक्षित, स्थायी और आशा के अनुरूप हैं। यह काम क्वालिटी कंट्रोल के तहत आता है।

क्लीनिकल रिसर्च में करियर ऑप्शन (Career Options in Clinical Research)
आज के समय में इंडिया के अंदर 30 हजार से ज्‍यादा रजिस्टर्ड फार्मास्युटिकल कंपनियां हैं। नए-नए उत्पादों के आने के कारण यह क्षेत्र आज सर्वाधिक संभावनाओं से भरा है। इस क्षेत्र में आप डॉक्टर प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, मेडिकल एडवाइजर, ड्रग डेवलपर और रेगुलेटरी अफेयर्स मैनेजर बन सकते हैं। वहीं पैरामेडिक्स, फार्मासिस्ट और लाइफ साइंस ग्रेजुएट मेडिकल राइटर्स, क्लीनिकल रिसर्च मैनेजर, क्लीनिकल रिसर्च एसोसिएट, फार्माकोविजिलेंस एक्जीक्यूटिव, ड्रग रिव्यूर जैसे अन्य पदों पर भी आप कार्य कर सकते हैं।

सैलरी
अगर आप क्लीनिकल रिसर्च में करियर बनाना चाहते हैं तो आपका शुरुआती पैकेज 4 से 5 लाख रूपये सालाना तक हो सकता है। वहीं कुछ साल के एक्सपीरियंस होने पर आमदनी 5 से 6 लाख रूपये सालाना तक हो सकती है। लेकिन फ्रेशर्स को पहली नौकरी मिलने में समस्या आती है। अधिकतर कंपनियां एक्सपीरियंस्ड प्रोफेशनल को नियुक्त करना पसंद करती हैं। पैकेज काफी हद तक छात्र के एकेडमिक बैकग्राउंड पर निर्भर करता है। एमबीबीएस, बीडीएस या एमफार्मेसी जैसी डिग्रियों वाले छात्रों का पैकेज ज्यादा होता है।

कोर्स के लिए प्रमुख संस्‍थान (Institute for Clinical Research Course)

  1. इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल रिसर्च
  2. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़
  3. दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस एंड रिसर्च
  4. मुंबई कॉलेज ऑफ फार्मेसी
  5. जामिया हमदर्द, नई दिल्ली
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