मैथ्स लव: टीनएज में गणित से दूरी डाल सकती है सोचने-समझने की क्षमता पर असर, तेज दिमाग के लिए मैथमेटिक्स से दोस्ती जरूरी

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16 घंटे पहले

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बच्चों के दिमाग के विकास के लिए गणित विषय जरूरी है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि, टीनएज में गणित की पढ़ाई छोड़ना या दूरी बनाने का असर छात्रों की सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ सकता है। 14 से 18 साल के 133 छात्रों पर हुई रिसर्च में यह बात सामने आई है। शोधकर्ता कहते हैं, ब्रिटेन में 16 साल के छात्र को गणित विषय छोड़ने की आजादी रहती है, जबकि दूसरे देशों में ऐसा नहीं होता। इसका सीधा असर छात्र के ब्रेन डेवलपमेंट पर पड़ता है।

सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करता है गणित से दूरी

शोधकर्ता कहते हैं, जो टीनएजर्स गणित विषय नहीं लेते हैं या दूरी बनाते हैं उनके दिमाग के खास हिस्से पर असर पड़ता है। दिमाग का जो हिस्सा सोचने-समझने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होता है वहां खास किस्म के केमिकल (गामा-अमीनोब्यूट्रिक एसिड) में कमी देखी गई। रिसर्च के दौरान स्टूडेंट्स को दो समूहों में बांटा गया। पहले समूह में गणित विषय के छात्र थे। वहीं, दूसरे समूह में ऐसे छात्र थे जिन्होंने गणित विषय नहीं लिया था।

19 महीने हुई छात्रों के दिमाग की जांच

करीब 19 महीने छात्रों के दिमाग की जांच की गई। जांच में सामने आया जिन छात्रों ने गणित विषय से दूरी बनाई थी, उनके दिमाग में 19 महीने बाद भी सोचने-समझने की क्षमता के लिए जिम्मेदार माना जाने वाला रसायन कम मात्रा में मिला। वहीं, गणित के छात्रों में यह केमिकल पर्याप्त मात्रा में था।

गणित का असर फिजिकल डेवलपमेंट पर भी

शोधकर्ता रोउ कोहेन कहते हैं, मैथ्स का छात्रों पर शारीरिक और मानसिक रूप से भी असर पड़ता है। टीनएज बहुत खास उम्र होती है, क्योंकि इस उम्र में ब्रेन का विकास होने के साथ सोचने-समझने की क्षमता भी विकसित होती है। लेकिन इसी दौर में कई छात्र गणित से दूरी बना लेते हैं, इसीलिए जरूरी है कि छात्रों को गणित से प्रेम करना चाहिए। इसके लिए कुछ जरूरी स्टेप्स ये हैं-

गणित क्या है पहले इसे समझे

अक्सर गणित को लेकर लोगों के मन में इस तरह का डर बना दिया जाता है कि जिन लोगों को गणित पढने में इंट्रेस्ट रहता भी है, वे इन सुनी-सुनाई बातों के चलते मन में एक डर का भाव बना लेते हैं कि मैथ्स तो सबसे कठिन विषय है जिसे पढने के लिए बहुत तेज दिमाग का होना जरुरी है।

क्रमबद्ध अध्ययन करें

गणित एक ऐसा सब्जेक्ट है जिसे अचानक कहीं से आप पढना शुरू करते हंै तो यह विषय जल्दी से समझ में नहीं आ सकता है। गणित पढने की एक पूरी प्रक्रिया होती है जिसे फॉलो करके एक स्टेप से दूसरे स्टेप तक बढ़ते हुए गणित को सीखा जाता है।

निरंतर अभ्यास करना

गणित एक ऐसा विषय है जिसका जितना अधिक अभ्यास करते हैं, यह उतना ही आसान लगता है। गणित के किसी भी चैप्टर के शुरू होने या खत्म होने के बाद कुछ अभ्यास के प्रश्न दिए होते हैं जिनका हल भी अक्सर बताया होता है। जब आप गणित पढ़ते है तो पहले उस चैप्टर को अच्छे से पढ़ें और समझ लंे फिर जो सवाल हल किये गए हैं आखिर वे किस कांसेप्ट से हल किए गये हैं यह अच्छी तरीके से समझने की कोशिश करें।

फार्मूले के आधार पर पढाई करें

गणित एक ऐसा सब्जेक्ट है जो कि फॉर्मूले पर आधारित होता है। अगर इन फॉर्मूलों को सही से समझ पाते हैं, तो फिर आसानी से गणित के सवालों को हल किया जा सकता है। मान लीजिये अगर आपसे कोई पूछता है 56 का 9 गुणा कितना होता है तो ऐसे में 56 के पहाड़े तो याद होंगे। नहीं तो यदि हमें गुणा करने का फॉर्मूला मालूम रहेगा तो इसे कुछ सेकेंड में ही मन में हल करके बता सकते हैं।

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