फीचर ऑर्टिकल: करियर काउंसिलिंग से पा सकते हैं मनचाहा मुकाम, काउंसलर संस्कृति ठाकुर बोलीं- बेहतर भविष्य के लिए सबसे पहले खुद पर ध्यान दें

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भोपाल4 घंटे पहले

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काउंसिलिंग करते हुए।

छात्रों को अगर करियर में कोई कंफ्यूजन हो तो वह अपने लक्ष्य को नहीं पा सकते हैं, लेकिन अगर छात्र को अच्छे करियर काउंलसर की ममद मिल जाती है तो वह अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सकते हैं। छात्रों के लिए करियर काउंसलिंग कितना जरूरी, और अपने आप को कैसे पहचान सकते हैं। इस विषय पर विस्तार से चर्चा की काउंसलर संस्कृति ठाकुर ने।

1.आपकी नज़र में शिक्षा क्षेत्र में काउंसलिंग का क्या महत्व है ?
शिक्षा के क्षेत्र में काउंसलिंग का विशेष महत्व है, क्योंकि इससे छात्रों और उनके अभिभावकों को बेहतर भविष्य के लिहाज से आवश्यक जानकारियां और मार्गदर्शन मिल पाता है। ऐसा कई बार होता है कि छात्रों और अभिभावकों को विभिन्न विषयों की गहरी समझ और उनसे जुड़े क्षेत्रों में अवसरों की जानकारियां नहीं होती हैं। इसमें काउंसलिंग विशेष भूमिका अदा करती है और छात्रों को उनकी क्षमता, रूचि और 12वीं या ग्रेजुएशन के विषय के अनुरूप आगे शिक्षा के क्षेत्र और विषयों की जानकारी मिलती है जिससे छात्र करियर के लिहाज से बेहतर विषय, कॉलेज इत्यादि चुन पाते हैं।

2. यू जी और पी जी के छात्रों की काउंसलिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रोजुएट छात्रों की काउंसलिंग करते समय खास तौर पर उनकी रूचि, 12वीं या ग्रेजुएशन के विषय, एलिजिबिलिटी और स्पोर्ट्स एवं कला इत्यादि क्षेत्रों में उनकी विशेष उपलब्धियों पर ध्यान दिया जाता है। इसी के अनुसार कोर्सेज और करियर की अपॉर्च्युनिटीज की जानकारी दी जाती है जिससे सही मार्गदर्शन दिया जा सके और कम समय में सफलता सुनिश्चित की जा सके।

3. ग्रेजुएशन किस विषय के साथ करें, जो एक बेहतर करियर दे सके?
यदि एक सामान्य बात की जाए तो ग्रेजुएशन के सभी विषयों में ढेर सारी संभावनाएं और करियर के अवसर उपलब्ध हैं। इसमें जॉब से लेकर आंत्रप्रेन्योरशिप तक में छात्र आगे बढ़ सकते हैं। परंतु यदि बात व्यक्तिगत रूप से किसी एक छात्र की करें, तो इसके लिए छात्र के 12वीं के विषय और रूचि के अनुरूप विकल्प सुझाए जाते हैं। हम आरएनटीयू में 11 फैकल्टीज में बड़ी संख्या में कोर्सेज उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अतिरिक्त वोकेशनल कोर्सेज, स्किल डेवलपमेंट कोर्सेज और आंत्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं। साथ ही आरएनटीयू के उद्योग जगत के साथ मजबूत संबंध हैं जिनके जरिए छात्रों को औद्योगिक क्षेत्र का व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होता है। इससे आरएनटीयू का प्रत्येक छात्र इतना क्षमतावान बन पाता है कि उसके लिए करियर की राह बेहद आसान हो जाती है। इसके अतिरिक्त यदि वर्तमान कोविड के बदले परिदृश्य में पसंद किए जा रहे विकल्पों की बाद करें तो पैरामेडिकल, नर्सिंग और एग्रीकल्चर के कोर्सेज छात्रों द्वारा पसंद किए जा रहे हैं क्योंकि उद्योग जगत को इसमें अधिक विशेषज्ञों की आवश्यकता है।

4 . क्या बीटेक करना आज भी उतना ही सही है, जितना एक दशक पहले हुआ करता था?
बीटेक या बीई का अपना महत्व आज भी है। इसमें बड़ी संख्या में रोजगार और आंत्रप्रेन्योरशिप के अवसर मौजूद हैं। परंतु बीते एक दशक में अंतर यह आया है कि अब अन्य विषयों में भी अवसर बढ़ गए हैं। जिनमें ह्यूमेनिटीज और लिबरल आर्ट के तहत बीए सायकोलॉजी, बीए इकोनॉमिक्स, फॉरेन लैंग्वेज कोर्स जैसे कई कोर्स में विकल्प शामिल हैं। यहां यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि अब बीई या बीटेक में भी कई नई ब्रांचेज उभर कर आई हैं जिनमें लोगों की रूचि बढ़ी है। इसे के चलते आरएनटीयू में अन्य कोर्सेज के अतिरिक्त बीई की छह ब्रांचेज में कोर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिनमें सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन, सीएस, आईटी और इलेक्टॉनिक इलेक्ट्रिकल (ईईई) शामिल हैं। वर्तमान में कम्प्यूटर और साइंस (सीएस) अत्यधिक प्रचलित कोर्सेज में शामिल है।
5. राजनीति में करियर क्या एक बेहतर विकल्प हो सकता है?
देश में साक्षरता की दर बढ़ रही है। इसी कारण पढ़े लिखे युवाओं की जरूरत और रूझान दोनों ही राजनीति में बढ़ता हुआ दिख रहा है। परंतु इसे करियर विकल्प के रूप में देखा जाना छात्रों की रूचि पर निर्भर करता है, क्योंकि यह क्षेत्र सफलता के लिए कड़ी मेहनत की अपेक्षा रखता है। इसके लिए आवश्यक कोर्स की बात की जाए तो पॉलीटिकल साइंस और कम्यूनिकेशन हैं। जो छात्रों को जरूरी ज्ञान उपलब्ध कराते हैं। इसके बाद व्यवहारिक ज्ञान के लिए छात्रों को लगातार समाज सेवा के कार्यों को करने की आवश्यकता होती है।

6. प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए किस तरह से तैयारी करनी चाहिए?
प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए तैयारी ग्रेजुएशन के दौरान ही शुरू की जानी चाहिए क्योंकि इसमें न्यूनतम योग्यता 21 वर्ष की आयु और किसी भी विषय में स्नातक पास या अंतिम वर्ष के विद्यार्थी हिस्सा ले सकते हैं। आरएनटीयू में पढ़ाए जाने वाले अधिकतर विषय सिविल सेवा परीक्षा की वैकल्पिक विषय सूची का भी हिस्सा हैं। जैसे- इतिहास, भौतिकी, पॉलिटिकल साइंस एवं इंजीनियरिंग के विभिन्न विषय। आरएनटीयू संस्थान के योग्य प्राध्यापक अपने विषयों के विशेषज्ञ हैं जो सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों को आवश्यक मार्गदर्शन दे पाने और उनकी तैयारी को सुदृढ़ बना पाने में सहायक होते हैं। सिविल सेवा की तैयारी अधिकतम दो वर्ष में आसानी से पूरी की जा सकती है।

7. ख़ुद को कौन से क्षेत्र में रुचि है ये कैसे जाने ?
अपनी रूचि को जानने के कई तरीके हो सकते हैं। इसमें सबसे पहले तो आप स्वयं पर ध्यान दें कि आपको सबसे अधिक खुशी किन चीजों को करने में मिलती है या यह देखें कि बचपन से अब तक आपकी उपलब्धियां किन क्षेत्रों में रही हैं। साथ ही अपने एकेडमिक, कल्चरल, स्पोर्ट्स की पसंदों पर भी ध्यान दें। आमतौर पर इनसे अपनी रूचि के बारे में जाना जा सकता है। इसके अतिरिक्त भी यदि समस्या हो तो सायकोमेट्रिक टेस्ट का सहारा लिया जा सकता है जो कि आरएनटीयू में बिना किसी शुल्क के कराया जाता है। यह सायकोमेट्रिक टेस्ट खासतौर पर आरएनटीयू की एक पहल है। जो छात्रों की रूचियों को समझने और करियर ऑप्शन सुझाने के लिए होता है। इसे आरएनटीयू की टीम विभिन्न स्कूलों में आरएनटीयू टैलेंट हंट के दौरान उपलब्ध कराती है। इसके अतिरिक्त छात्र 9319866685 मोबाइल नंबर पर बात करके भी सायकोमेट्रिक टेस्ट के बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं। यह सेवा छात्रों के लिए पूरी तरह निशुल्क है।

8. मौजूदा दौर में बच्चें खुद को सकारात्मक कैसे रखें?
वर्तमान में कोविड -19 की महामारी के कारण एक नकारात्मकता का माहौल जरूर बना है, परंतु हम जानते हैं कि प्रत्येक चीज के दो पहलू होते हैं। आज लॉकडाउन के कारण भले हमें घर में रहना पड़ रहा है, पर इस खाली समय का सदुयपयोग कर हम स्वयं को आने वाले समय के लिए तैयार कर सकते हैं। इसके लिए हम अपनी रूचि के अनुसार विभिन्न तकनीकी या कलात्मक कोर्स कर सकते हैं। जो ऑनलाइन बड़ी संख्या में मौजूद हैं। इनमें से कई मुफ्त भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा अपनी हॉबीज जैसे पेटिंग, डांसिंग, सिंगिंग, कुकिंग, राइटिंग, रीडिंग, योगा इत्यादि पर ध्यान देने का यह सबसे अच्छा समय है। ये सभी चीजें आपको सकारात्मक बनाएंगी।

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