इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भर्ती: असिस्टेंट प्रोफेसर्स की सीधे इंटरव्यू से भर्ती, लिखित परीक्षा लेने का फैसला पलटा; शिक्षकों के 595 और गैर-शैक्षणिक के 632 पद भी जल्द भरे जाएंगे

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प्रयागराज3 घंटे पहले

असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्ती को लेकर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने मंगलवार को एकेडमिक काउंसिल के फैसले को पलट दिया।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (AU) में सीधे इंटरव्यू के जरिए ही असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती होगी। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने मंगलवार को एकेडमिक काउंसिल के फैसले को पलट दिया। इसके मुताबिक, असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी। कार्यपरिषद ने इसी के साथ रिक्त पड़े 595 शिक्षकों के पदों पर भर्ती की मंजूरी भी दे दी। इनमें 357 असिस्टेंट प्रोफेसर, 168 एसोसिएट प्रोफेसर और 78 प्रोफेसर के पदों पर भर्ती होनी है। जल्द ही इसके लिए विज्ञापन जारी होगा।

4 अगस्त को एकेडमिक काउंसिल ने लिया था फैसला
विश्वविद्यालय में पिछले चार अगस्त को एकेडमिक काउंसिल की बैठक हुई थी। इसमें तय हुआ था कि इस बार असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा आयोजित कराई जाएगी। इसमें क्वालीफाई करने वाले अभ्यर्थियों के रजिस्ट्रेशन की स्क्रीनिंग होगी और फिर उस आधार पर इंटरव्यू कराए जाएंगे। काउंसिल ने ये फैसला UGC रेगुलेशन 2018 के तहत लिया था।

कार्यपरिषद ने क्या कहा ?
एकेडमिक काउंसिल के फैसले को कार्यपरिषद ने मंजूरी नहीं दी। कार्यपरिषद के ज्यादातर सदस्यों ने कहा कि UGC की गाइडलाइन में कहीं ये नहीं कहा गया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा अनिवार्य है। सदस्यों ने कहा कि इससे पूरी प्रक्रिया जटिल हो जाएगी। इसलिए इसे हटाया जा सकता है। इस पर परिषद ने मुहर लगा दी।

632 गैर-शैक्षणिक पदों पर भी होगी भर्ती
कार्यपरिषद ने 632 गैर शैक्षणिक पदों की भर्ती के लिए रोस्टर का भी प्रेजेंटेशन दिया गया। 632 रिक्त पदों में ग्रुप A के 32, ग्रुप B के 73 और ग्रुप C 527 पद हैं। ये भी तय हुआ कि हिंदी टाइपिस्ट, हिंदी ट्रांसलेटर और हिंदी अफसर के पदों पर भर्ती के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी किया जाएगा।

बैठक में और क्या हुआ ?

  • विश्वविद्यालय की एक शिक्षिका की तरफ से एक सीनियर प्रोफेसर पर लगाए गए आरोप के मामले में भी चर्चा हुई। तय हुआ कि इस शिकायत को विश्वविद्यालय के सी-कैश को सौंप दिया जाए। सी-कैश कार्य परिषद की अगली बैठक में रिपोर्ट देगी फिर निर्णय लिया जाएगा।
  • बैठक में साइंस एंड सोसाइटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. रोहित मिश्र की सेवा समाप्त करने का भी निर्णय लिया गया। डॉ. रोहित की योग्यता पर सवाल खड़े हुए थे। जांच में आरोप सही पाए गए थे।
  • बिना कुलपति के अनुमति के ऑस्ट्रेलिया जाने वाली इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग की डॉ. ऋचा मिश्रा को कार्य परिषद से सस्पेंड कर दिया गया। उनके खिलाफ जांच भी बैठाई गई है।
  • पांच साल से अनुपस्थित रसायन विज्ञान विभाग के लैब असिस्टेंट्स के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है। इनके खिलाफ कई बार हेड ऑफ डिपार्टमेंट ने शिकायत की थी।
  • विश्वविद्यालय में 23 सितंबर को प्रस्तावित दीक्षा समारोह को लेकर भी चर्चा हुई। बताया गया कि समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, कुलाधिपति आशीष चौहान, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन प्रोफेसर डीपी सिंह ने आने की स्वीकृति दे दी है।

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